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राजयोग

कुंडली में चंद्रमा ग्यारहवें घर में और गुरु तीसरे घर में स्थित होने पर राजयोग बनता है। इस योग को लेकर पैदा हुआ व्यक्ति राजा के समान होता है। यह अपने समाज में प्रसिद्धि प्राप्त करता है और धन संपन्न होता है। इस तरह कुंडली के पांचवें घर में बुध और दसवें घर में चंद्रमा होने पर राजयोग का फल प्राप्त होता है।

जीवन में जहां कदम-कदम पर संघर्ष होता है, वहीं कुछ व्‍यक्‍ति कुंडली में ऐसे योग लेकर जन्‍म लेते हैं क‍ि उनकी पूरी जिंदगी आराम, शासन और ठाट से गुजरती है। ऐसे लोगों के लिए ही कहा जाता है क‍ि वे राजयोग के साथ पैदा हुए हैं। प्राय: ऐसे लोगों को धन की कमी नहीं होती और जहां भी वे कदम रखते हैं, सफलता उनके साथ चलती है। यही नहीं, इनका व्‍यक्‍त‍ित्‍व भी अत्‍यंत प्रभावशाली होता है और लोग उनके सम्‍मोहन में बंधते चले जाते हैं।

सुख और समृद्धि के अलावा जिसके पास बहुत बड़ी सत्ता हो, शक्ति हो और जिसके आदेश का पालन लोग करते हों, वही एक प्रकार का राजयोग है। राजयोग सभी योगों का राजा है। जन्मकुंडली में राजयोग की विधिवत व्याख्या की गई है। वैसे ज्योतिष में कुल 32 प्रकार के राजयोग होते हैं। प्रायः ये 32 योग एक साथ किसी कुंडली में मिलते नहीं हैं ।यदि ये सभी मिल जाय तो जातक चक्रवर्ती विश्व विजयी राजा होता है।

नीचभंग राजयोग

ये बहुत प्रभावशाली राजयोग होता है। जब कुंडली में 6, 8 और 12वें घर के स्वामी इसी भाव में स्थित हों तो यह राजयोग बनता है। ऐसा जातक राजनीति और प्रशासन के उच्च पद को सुशोभित करता है। जिस ग्रह से नीचभंग राजयोग बनता है, उसी ग्रह के फील्ड में व्यक्ति राजा होता है। यदि यह स्थिति सूर्य से बनती है तो ऐसे जातक की लोकप्रियता बहुत अधिक होती है। बहुत साधारण परिवार में जन्म लिया बच्चा भी इस योग के कारण विश्वस्तर का बन सकता है।

गजकेसरी योग

गुरु से चंद्रमा केंद्र में या दोनों एक साथ केन्द्रस्थ हों तो गजकेसरी योग बनता है। गजकेसरी एक महान राजयोग होता है। ऐसा जातक जीवन में कोई बड़ा कार्य करता है। वह विद्वान होता है और धन, पद तथा प्रतिष्ठा की प्राप्ति करता है। जन्म के समय जो ग्रह नीच राशि में हो उस राशि का स्वामी या उसकी उच्च राशि का स्वामी लग्न में हो या चंद्रमा से केंद्र में हो तो ऐसा जातक राजा होता है।

बुधादित्य योग

सूर्य और बुध के एक साथ होने पर बुधादित्य योग बनता है। ऐसा जातक सूर्य के समान तेजस्वी होता है। जीवन में राजनीति में बहुत सफल होता है। प्रशासनिक अधिकारी होता है। लग्न, पंचम और नवम के स्वामी एक दूसरे के घर में हों तो ऐसे जातक राजा होते हैं।

जिस जातक के लग्न, पंचम और नवम में शुभ ग्रह स्थित हों, उसे भी राजयोग मिलता है। एकादश भाव में कई शुभ ग्रह एक साथ विराजमान होने पर भी राज योग बनता है। त्रिकोण के गृह स्वग्रही या उच्च के हों तो ऐसा जातक जीवन में बहुत धन अर्जित करता है और कई धार्मिक कार्य करता है। ऐसे जातक अक्‍सर विद्यालय खोलते हैं, मन्दिर और धर्मशाला बनवाते हैं। साथ ही वे बहुत ही धनी, दानी और लोकप्रिय होते हैं।

कर्क लग्न के जातक बहुत सफल राजनीतिज्ञ होते हैं। गुरु यदि चंद्र के साथ लग्न में स्थित हो और सूर्य की स्थिति मजबूत हो तो ऐसा जातक बहुत लोकप्रिय नेता होता है। भारत के कई प्रधानमंत्री और देश विदेश कब बड़े नेता कर्क लग्न वाले ही हैं।

शुक्र भी राजयोग बनाता है। फ‍िल्म और संगीत में लोकप्रियता और सफलता के लिए शुक्र का मजबूत होना बहुत जरूरी है। इसके ल‍िए जरूरी है क‍ि केंद्र का शुक्र हो, स्वराशि का हो, त्रिकोण में हो और तुला या वृष में स्थित हो। अपनी उच्च राशि में केंद्र या त्रिकोण में हो तो ऐसा जातक कला, फ‍िल्म, संगीत और साहित्य में विश्व स्तर पर नाम करता है।